Sarkari Man

Apka News Paper

Two new ramps will be built on the Hindon Elevated Road in Ghaziabad, costing ₹90 crore; connectivity between Indirapuram and Vasundhara will be easier.

गाजियाबाद में हिंडन एलिवेटेड रोड पर बनेंगे 2 नए रैंप, ₹90 करोड़ होंगे खर्च; इंदिरापुरम और वसुंधरा की कनेक्टिविटी होगी आसान

गाजियाबाद: दिल्ली-NCR के लोगों के लिए राहत की खबर है। गाजियाबाद के हिंडन एलिवेटेड रोड पर दो नए स्लिप-रोड रैंप बनाए जा रहे हैं। करीब ₹90 करोड़ की लागत वाली इस परियोजना का निर्माण शुरू हो चुका है और इसे लगभग 18 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

इन नए रैंप का उद्देश्य हिंडन एलिवेटेड रोड और इंदिरापुरम तथा वसुंधरा के बीच मौजूदा कनेक्टिविटी गैप को खत्म करना है। इससे वाहन चालकों को कई जगहों पर लंबा चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

590 और 620 मीटर लंबे होंगे नए रैंप

परियोजना के तहत दो नए रैंप बनाए जाएंगे।

पहला रैंप करीब 590 मीटर लंबा होगा।
दूसरा रैंप करीब 620 मीटर लंबा होगा।
दोनों रैंप की चौड़ाई करीब 7.5 मीटर होगी।
इन पर वाहनों के लिए करीब 40-50 किमी प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड रखी गई है।

रैंप के निर्माण में Prestressed Concrete Girders का इस्तेमाल किया जाएगा। करीब 30 मीटर के अंतराल पर precast girders लगाए जाने की योजना है, जिससे निर्माण को अपेक्षाकृत तेजी से पूरा करने में मदद मिलेगी।

दो 50 मीटर की रोटरी भी बनेंगी

नए रैंप के जमीन से जुड़ने वाले हिस्सों पर करीब 50 मीटर व्यास की दो रोटरी भी बनाई जाएंगी।

इनका उद्देश्य एलिवेटेड रोड से आने-जाने वाले वाहनों और आसपास की सड़कों के ट्रैफिक को बेहतर तरीके से व्यवस्थित करना है। इससे ट्रैफिक मूवमेंट में टकराव कम करने और वाहनों की आवाजाही को सुचारु बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

अभी कहां है कनेक्टिविटी की समस्या?

हिंडन एलिवेटेड रोड का निर्माण 2018 में शुरू किया गया था और यह गाजियाबाद के UP Gate/गाजीपुर बॉर्डर क्षेत्र को राजनगर एक्सटेंशन से जोड़ता है।

मौजूदा व्यवस्था में वसुंधरा की ओर एक रैंप से वाहन एलिवेटेड रोड पर राजनगर एक्सटेंशन की दिशा में जा सकते हैं। वहीं, कनावनी-इंदिरापुरम क्षेत्र में मौजूद दूसरे रैंप से राजनगर एक्सटेंशन की तरफ से आने वाले वाहन UP Gate की दिशा में उतर सकते हैं।

लेकिन कुछ महत्वपूर्ण दिशाओं में सीधी कनेक्टिविटी उपलब्ध नहीं है।

वसुंधरा से UP Gate की तरफ जाने वाले वाहनों को वर्तमान में सीधे एलिवेटेड रोड का इस्तेमाल करने की सुविधा नहीं मिलती। इसी तरह कनावनी की ओर से आने वाले वाहन भी एलिवेटेड रोड के जरिए इंदिरापुरम की ओर सीधे नहीं जा सकते।

नए रैंप इन्हीं missing movements को पूरा करने के लिए बनाए जा रहे हैं।

इंदिरापुरम और वसुंधरा के लोगों को मिलेगा फायदा

नए रैंप तैयार होने के बाद:

वसुंधरा से UP Gate की ओर सीधा कनेक्शन बेहतर होगा।
एलिवेटेड रोड से आने वाले वाहनों को इंदिरापुरम की ओर बेहतर पहुंच मिलेगी।
आसपास की सड़कों पर अनावश्यक ट्रैफिक दबाव कम हो सकता है।
वाहन चालकों को लंबा वैकल्पिक रास्ता लेने की जरूरत कम होगी।
हिंडन एलिवेटेड रोड का इस्तेमाल और अधिक प्रभावी हो सकेगा।
18 महीने में पूरा करने का लक्ष्य

करीब ₹90 करोड़ की लागत वाली इस परियोजना पर निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। अधिकारियों की योजना के अनुसार दोनों रैंप का निर्माण लगभग 18 महीने में पूरा करने का लक्ष्य है।

निर्माण पूरा होने के बाद हिंडन एलिवेटेड रोड के आसपास एक अधिक complete interchange system तैयार होने की उम्मीद है, जिससे गाजियाबाद के प्रमुख इलाकों के बीच यातायात कनेक्टिविटी बेहतर हो सकती है।

बढ़ते ट्रैफिक के बीच अहम प्रोजेक्ट

हिंडन एलिवेटेड रोड पिछले कुछ वर्षों में गाजियाबाद के उत्तर-दक्षिण ट्रैफिक के लिए महत्वपूर्ण कॉरिडोर बन गया है। आसपास के इलाकों में आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ने के साथ इस रोड पर बेहतर entry और exit points की जरूरत भी बढ़ी है।

दो नए रैंप बनने के बाद इंदिरापुरम, वसुंधरा, कनावनी, UP Gate और राजनगर एक्सटेंशन के बीच आवागमन को अधिक सीधा और सुविधाजनक बनाने में मदद मिल सकती है।

एक नजर में

📍 प्रोजेक्ट: हिंडन एलिवेटेड रोड
💰 लागत: करीब ₹90 करोड़
🛣️ नए रैंप: 2
📏 लंबाई: करीब 590 मीटर और 620 मीटर
↔️ चौड़ाई: 7.5 मीटर प्रत्येक
🚗 डिजाइन स्पीड: 40-50 किमी/घंटा
🔄 रोटरी: 2, करीब 50 मीटर व्यास
⏳ लक्ष्य: 18 महीने में निर्माण पूरा
📍 फायदा: इंदिरापुरम, वसुंधरा और आसपास के इलाकों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी।

निष्कर्ष: हिंडन एलिवेटेड रोड पर बनने वाले ये दो नए रैंप गाजियाबाद की मौजूदा ट्रैफिक कनेक्टिविटी में महत्वपूर्ण सुधार ला सकते हैं। खासतौर पर वसुंधरा और इंदिरापुरम से जुड़े उन वाहन चालकों को फायदा मिलने की उम्मीद है, जिन्हें अभी कुछ दिशाओं में जाने के लिए वैकल्पिक और लंबे रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ता है।