महाराष्ट्र में मिली फंगस की नई प्रजाति, BSI वैज्ञानिकों ने खोजी Corynespora bharatensis
New Fungal Species Discovered: भारत की जैव विविधता में एक और महत्वपूर्ण खोज सामने आई है। Botanical Survey of India (BSI) के पश्चिमी क्षेत्रीय केंद्र, पुणे के वैज्ञानिकों ने फंगस की एक नई प्रजाति की खोज और वैज्ञानिक पहचान की है। इस नई प्रजाति का नाम Corynespora bharatensis रखा गया है। शोध से जुड़ा अध्ययन 11 सितंबर 2026 को Phytotaxa में प्रकाशित हुआ।
पश्चिमी घाट क्षेत्र में मिली नई फंगस
वैज्ञानिकों को यह नई फंगस प्रजाति महाराष्ट्र के पुणे स्थित BSI के Western Regional Centre के परिसर में एक गिरी हुई टहनी पर मिली। यह टहनी Ficus religiosa, यानी पीपल के पेड़ की थी।
शोधकर्ताओं ने जून 2025 में माइक्रोफंगल विविधता के अध्ययन के दौरान इस फंगस को देखा। इसके बाद वैज्ञानिकों ने इसके आकार, संरचना और आनुवंशिक विशेषताओं का विस्तृत अध्ययन किया।
तीन वैज्ञानिकों ने की नई प्रजाति की पहचान
इस खोज से जुड़े शोधकर्ताओं में डॉ. रश्मि दुबे, डॉ. अमित डी. पांडे और डॉ. सायंतन जश शामिल हैं। तीनों वैज्ञानिक BSI के Western Regional Centre, Pune स्थित Myco-Molecular Research Laboratory से जुड़े हैं।
कैसे साबित हुआ कि यह नई प्रजाति है?
वैज्ञानिकों ने इस फंगस की पहचान के लिए पारंपरिक माइक्रोस्कोपिक अध्ययन के साथ आधुनिक DNA तकनीक का इस्तेमाल किया। इस प्रक्रिया को Polyphasic Taxonomy कहा जाता है।
अध्ययन के दौरान फंगस की शारीरिक और सूक्ष्म संरचनाओं की जांच की गई। इसके अलावा DNA के तीन प्रमुख आनुवंशिक मार्करों—
ITS
LSU
SSU
का विश्लेषण किया गया।

इसके बाद किए गए Phylogenetic Analysis में Corynespora bharatensis को एक अलग और मजबूत आनुवंशिक वंशावली के रूप में पहचाना गया। यह प्रजाति Corynespora aquilariae के करीब पाई गई, लेकिन इसके विशिष्ट आकार और आनुवंशिक विशेषताओं ने इसे एक अलग प्रजाति के रूप में स्थापित करने में मदद की।
माइक्रोस्कोप में दिखी खास पहचान
शोध के अनुसार, इस फंगस में गहरे रंग के और लंबे Conidiophores के विशेष समूह तथा कई विभाजनों वाले Conidia पाए जाते हैं। इसकी ये सूक्ष्म विशेषताएं इसे Corynespora की अन्य संबंधित प्रजातियों से अलग पहचानने में मदद करती हैं।
वैज्ञानिकों ने इसके morphological characteristics की तुलना और molecular evidence को एक साथ आधार बनाकर इसे नई प्रजाति के रूप में मान्यता दी।
फंगस की खोज क्यों है महत्वपूर्ण?
फंगस प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ये मृत जैविक पदार्थों के अपघटन, पोषक तत्वों के चक्रण और पौधों एवं सूक्ष्मजीवों के बीच होने वाली प्रक्रियाओं में अहम भूमिका निभाते हैं।
इसके बावजूद दुनिया और भारत में फंगस की बड़ी संख्या ऐसी है जिनकी अभी तक वैज्ञानिक रूप से पहचान और दस्तावेजीकरण नहीं हुआ है। नई प्रजाति की यह खोज बताती है कि पश्चिमी घाट क्षेत्र में अभी भी बड़ी संख्या में सूक्ष्म जैव विविधता के रहस्य छिपे हो सकते हैं।
प्रजाति के नाम में छिपा है भारत से जुड़ा संदेश
नई फंगस प्रजाति का नाम Corynespora bharatensis रखा गया है। इसके नाम में “Bharat” शब्द का इस्तेमाल किया गया है, जो भारत के आधिकारिक नामों में से एक है।
इस तरह इस नई प्रजाति का नाम इसे भारत की जैव विविधता और वैज्ञानिक खोज से सीधे जोड़ता है।
एक नजर में
जानकारी विवरण
नई प्रजाति Corynespora bharatensis
खोजकर्ता संस्था Botanical Survey of India (BSI)
केंद्र Western Regional Centre, Pune
स्थान पुणे, महाराष्ट्र
खोज का समय जून 2025
जिस पौधे पर मिली Ficus religiosa (पीपल)
अध्ययन प्रकाशित 11 सितंबर 2026
जर्नल Phytotaxa
पहचान की विधि Morphological + Molecular Analysis
DNA मार्कर ITS, LSU और SSU
संबंधित प्रजाति Corynespora aquilariae
शोधकर्ता डॉ. रश्मि दुबे, डॉ. अमित डी. पांडे, डॉ. सायंतन जश
निष्कर्ष
एक साधारण सी गिरी हुई पीपल की टहनी पर मिली फंगस ने वैज्ञानिकों को एक नई प्रजाति तक पहुंचा दिया। Corynespora bharatensis की खोज यह दर्शाती है कि भारत, विशेषकर पश्चिमी घाट जैसे जैव विविधता वाले क्षेत्रों में, अभी भी कई ऐसे जीव मौजूद हो सकते हैं जिनकी वैज्ञानिक पहचान बाकी है। आधुनिक DNA तकनीकों और पारंपरिक वैज्ञानिक अध्ययन के संयोजन से ऐसी खोजें भारत की जैव विविधता को समझने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।












