यरकौड में जलवायु परिवर्तन जागरूकता कार्यक्रम, 55 शिक्षकों ने लिया हिस्सा
यरकौड: पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से नेशनल ऑर्किडेरियम एंड एक्सपेरिमेंटल गार्डन (NOEG), बॉटनिकल सर्वे ऑफ इंडिया (BSI), यरकौड में जलवायु परिवर्तन जागरूकता एवं संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में धर्मपुरी जिले के 55 स्कूल शिक्षकों ने भाग लिया।
जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों पर चर्चा
कार्यक्रम में BSI के निदेशक डॉ. कनाड दास ने जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने पर्यावरण से जुड़ी उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक और निरंतर प्रयासों की आवश्यकता बताई।
वहीं, वैज्ञानिक-एफ और तकनीकी प्रभारी डॉ. एस. एस. दाश ने कहा कि विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता विकसित करने में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने शिक्षकों से जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ जीवनशैली जैसे विषयों के प्रति छात्रों को जागरूक करने का आह्वान किया।
हरियाली बढ़ाने और पौधरोपण पर जोर
BSI, दक्षिणी क्षेत्रीय केंद्र, कोयंबटूर के वैज्ञानिक-एफ एवं कार्यालय प्रमुख डॉ. एस. एस. हमीद ने जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में पौधरोपण और हरित क्षेत्र बढ़ाने के महत्व पर जोर दिया।
कार्यक्रम के दौरान NOEG के प्रभारी वैज्ञानिक-ई डॉ. एस. कालीमूर्ति ने प्रतिभागियों का स्वागत किया और टिकाऊ भविष्य के निर्माण में पर्यावरणीय जागरूकता की भूमिका पर विचार रखे।
वैज्ञानिकों और शिक्षकों के बीच हुआ संवाद
कार्यक्रम में BSI के वैज्ञानिकों और स्कूल शिक्षकों के बीच इंटरैक्टिव संवाद सत्र आयोजित किया गया। इसमें जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।
इस दौरान शिक्षकों ने पर्यावरण से संबंधित मुद्दों पर अपने विचार और सवाल भी साझा किए। संवाद का उद्देश्य स्कूल स्तर पर पर्यावरण जागरूकता को और मजबूत करना रहा।
पौधरोपण के साथ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम के अंत में पौधरोपण अभियान आयोजित किया गया। पौधरोपण को पर्यावरण संरक्षण और हरित भविष्य के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम ने शिक्षकों को जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण के विषयों को विद्यार्थियों तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया।
संदेश: आज लगाया गया हर पौधा आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, हरित और सुरक्षित भविष्य की उम्मीद है।










