चीन ने 6 हजार से ज्यादा दूध की बोतलों से बनाई ‘प्लास्टिक रोड’, कचरे को बनाया सड़क बनाने का सामान
नई दिल्ली: प्लास्टिक कचरे की समस्या से निपटने के लिए दुनिया में कई तरह के प्रयोग किए जा रहे हैं। ऐसा ही एक अनोखा प्रयोग चीन के शंघाई में सामने आया, जहां 6,000 से ज्यादा इस्तेमाल की गई दूध की प्लास्टिक बोतलों और अन्य प्लास्टिक कचरे को सड़क निर्माण में इस्तेमाल किया गया। यह परियोजना 2021 में East China University of Science and Technology (ECUST) के शुहुई कैंपस में शुरू की गई थी।
दूध की बोतलों से कैसे बनी सड़क?
इस परियोजना में बेकार प्लास्टिक को सीधे सड़क की सतह के रूप में नहीं बिछाया गया। प्लास्टिक कचरे को प्रोसेस करके post-consumer recycled plastic में बदला गया और फिर इसे polymer-modified asphalt में शामिल किया गया।
इस तरह हजारों ऐसी बोतलों को सड़क निर्माण में इस्तेमाल किया गया, जिन्हें सामान्य रीसाइक्लिंग व्यवस्था में संभालना मुश्किल माना जाता था।
आखिर दूध की बोतलें रीसाइकिल करना क्यों मुश्किल था?
दूध की प्लास्टिक बोतलें तकनीकी रूप से रीसाइकिल की जा सकती हैं, लेकिन बोतलों में बचे दूध के अवशेषों के कारण contamination की समस्या पैदा होती है। इसी वजह से कई रीसाइक्लर्स ऐसी बोतलों को स्वीकार करने में रुचि नहीं दिखाते।
यानी प्लास्टिक रीसाइकिल योग्य होने के बावजूद व्यावहारिक स्तर पर उसका इस्तेमाल सीमित रह जाता है और वह कचरे में जा सकता है।
Dow और Shiny Meadow की साझेदारी
इस अनोखे प्रोजेक्ट को Dow और डेयरी ब्रांड Shiny Meadow ने मिलकर विकसित किया था। इसका उद्देश्य ऐसे प्लास्टिक को उपयोगी बनाना था, जिसकी पारंपरिक रीसाइक्लिंग व्यवस्था में बहुत कम कीमत या उपयोग रह जाता है।
Earth Day के मौके पर इस परियोजना को सामने रखा गया था।
सड़क निर्माण में प्लास्टिक इस्तेमाल करने का फायदा क्या?
परियोजना को केवल प्लास्टिक कचरे को हटाने के तरीके के रूप में नहीं देखा गया। इसके पीछे विचार यह भी था कि प्लास्टिक को सड़क निर्माण में इस्तेमाल करने से बिटुमेन की जरूरत कम हो सकती है और सड़क की उपयोगी अवधि बढ़ाने की संभावना बन सकती है।
Dow के अनुसार, इस तरह के इस्तेमाल से ऊर्जा की खपत और greenhouse-gas emissions को कम करने में भी संभावित मदद मिल सकती है। हालांकि ये संभावित पर्यावरणीय लाभ हैं और इन्हें परियोजना के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
चीन से दूसरे एशियाई देशों तक पहुंचा प्रयोग
शंघाई का यह प्रोजेक्ट अकेला प्रयोग नहीं था। Dow ने एशिया के दूसरे हिस्सों में भी recycled plastic को सड़क निर्माण में इस्तेमाल करने की परियोजनाओं पर काम किया है।
कंपनी के अनुसार, इंडोनेशिया के Depok City में 2017 से ऐसे काम शुरू हुए थे। इसके बाद भारत में Pune और Bengaluru तथा थाईलैंड में भी recycled plastic roads से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर सहयोग किया गया।
कचरे से सड़क तक—क्या है इस प्रयोग की खासियत?
इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि जिस प्लास्टिक को पारंपरिक रीसाइक्लिंग सिस्टम में कम उपयोगी माना जाता था, उसे infrastructure material के रूप में इस्तेमाल करने का रास्ता खोजा गया।
यानी दूध की खाली बोतल का सफर कूड़ेदान से शुरू होकर सड़क की सतह तक पहुंच गया। यह मॉडल circular economy की सोच को बढ़ावा देता है, जिसमें इस्तेमाल के बाद किसी वस्तु को दोबारा उपयोगी संसाधन में बदलने की कोशिश की जाती है।
एक नजर में
स्थान: शंघाई, चीन
साल: 2021
प्लास्टिक बोतलें: 6,000 से ज्यादा
अन्य सामग्री: दूसरे hard-to-recycle plastic waste
उपयोग: Polymer-modified asphalt
स्थान: East China University of Science and Technology
साझेदार: Dow और Shiny Meadow
उद्देश्य: प्लास्टिक कचरे को उपयोगी सड़क निर्माण सामग्री में बदलना
निष्कर्ष
चीन का यह प्रयोग दिखाता है कि रीसाइक्लिंग की चुनौती को infrastructure की जरूरत से जोड़ा जा सकता है। 6,000 से ज्यादा दूध की बोतलों को सड़क निर्माण में इस्तेमाल कर यह परियोजना ऐसे प्लास्टिक को नया उपयोग देने की कोशिश थी, जिसे पारंपरिक रीसाइक्लिंग सिस्टम में संभालना आसान नहीं था।












