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Noida International Airport: जेवर एयरपोर्ट ने भरी उड़ान, लेकिन दिल्ली से पहुंचने की राह अभी भी चुनौती

Noida International Airport: जेवर एयरपोर्ट ने भरी उड़ान, लेकिन दिल्ली से पहुंचने की राह अभी भी चुनौती

Noida International Airport News: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर से व्यावसायिक उड़ानें शुरू होने के बाद दिल्ली-NCR के लिए एक नया हवाई विकल्प सामने आया है। एयरपोर्ट का टर्मिनल आधुनिक, व्यवस्थित और यात्रियों के लिए सुविधाजनक नजर आ रहा है, लेकिन एयरपोर्ट तक पहुंचने की कनेक्टिविटी अभी उस स्तर तक नहीं पहुंची है, जिसकी उम्मीद इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से की जा रही है।

15 जून 2026 से यहां व्यावसायिक उड़ानें शुरू हुई थीं। फिलहाल एयरपोर्ट का पहला चरण संचालित हो रहा है और करीब 15 शहरों को जोड़ते हुए रोजाना लगभग 3 से 35 उड़ानों का संचालन किया जा रहा है। एयरपोर्ट करीब 1,334 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित किया गया है।

एयरपोर्ट शानदार, लेकिन सफर की असली परीक्षा बाहर

जेवर एयरपोर्ट के अंदर यात्रियों को आधुनिक और शांत माहौल मिलता है, लेकिन टर्मिनल से बाहर निकलते ही निर्माणाधीन हिस्से और अधूरी कनेक्टिविटी इस परियोजना के शुरुआती दौर की तस्वीर दिखाती है।

नोएडा और ग्रेटर नोएडा में रहने वाले यात्रियों के लिए एयरपोर्ट काफी सुविधाजनक साबित हो रहा है। इसके उलट दिल्ली के कई हिस्सों से आने वाले यात्रियों के लिए लंबी सड़क यात्रा और महंगी कैब अभी बड़ी समस्या बनी हुई है।

दिल्ली से जेवर एयरपोर्ट पहुंचना अभी महंगा

दिल्ली से जेवर एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों के सामने सबसे बड़ी परेशानी पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सीमित उपलब्धता है। फिलहाल बड़ी संख्या में यात्री निजी कार, टैक्सी या ऐप आधारित कैब पर निर्भर हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली से एयरपोर्ट तक कैब का किराया स्थान के हिसाब से लगभग 1,200 से 3,500 रुपये तक पहुंच सकता है। कुछ यात्रियों के लिए एयरपोर्ट तक पहुंचने का खर्च ही टिकट की कीमत के बराबर या उससे अधिक हो जाता है।

ऑटो से भी पूरी राहत नहीं

ग्रेटर नोएडा के एक यात्री के अनुभव ने कनेक्टिविटी की एक और समस्या सामने रखी। एयरपोर्ट जाने के दौरान ऑटो मुख्य गेट से आगे नहीं जा सका। यात्री को सामान लेकर इंतजार करना पड़ा और फिर अंतिम करीब 1 से 1.5 किलोमीटर की दूरी के लिए कैब लेनी पड़ी।

इस वजह से करीब 120 रुपये अतिरिक्त खर्च हुए। ऐसे मामलों से पता चलता है कि एयरपोर्ट तक सड़क पहुंच होने के बावजूद लास्ट-माइल कनेक्टिविटी अभी पूरी तरह सुचारु नहीं है।

कुछ यात्रियों के लिए दो घंटे से ज्यादा का सफर

दिल्ली के अलग-अलग इलाकों से जेवर पहुंचने में यात्रा का समय काफी बदल जाता है। कुछ यात्रियों ने एयरपोर्ट के आसपास पहुंचने में करीब दो घंटे और इसके बाद टर्मिनल तक पहुंचने में अतिरिक्त समय लगने की बात कही।

यानी एयरपोर्ट का इस्तेमाल करने वाले यात्री के लिए केवल उड़ान का समय महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि घर से एयरपोर्ट तक पहुंचने का समय और खर्च भी बड़ा फैक्टर बन रहा है।

बस सेवा शुरू, लेकिन नेटवर्क अभी सीमित

ऐसा नहीं है कि जेवर एयरपोर्ट के लिए सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध नहीं है। उत्तर प्रदेश रोडवेज की बसें एयरपोर्ट को नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, आगरा, मथुरा, वृंदावन, मेरठ, अलीगढ़, बुलंदशहर, फरीदाबाद, पलवल सहित कई शहरों से जोड़ रही हैं।

इसके अलावा हरियाणा रोडवेज की सेवाएं फरीदाबाद और पलवल के लिए उपलब्ध हैं। नोएडा सिटी सेंटर और सेक्टर-35 मोरना बस डिपो से भी एसी इलेक्ट्रिक बस सेवा जुड़ी हुई है। एयरपोर्ट की साझेदारी के जरिए इंटरसिटी बसों की बुकिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।

हालांकि दिल्ली के प्रमुख इलाकों, रेलवे स्टेशनों और ISBT से सीधी बस सेवा को लेकर चर्चा चल रही है, लेकिन इसके लिए अभी कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं हुई है।

मेट्रो और नमो भारत से बदल जाएगी तस्वीर

जेवर एयरपोर्ट की सबसे बड़ी उम्मीद भविष्य की रेल कनेक्टिविटी से जुड़ी है। एयरपोर्ट के मास्टर प्लान में सड़क के साथ मेट्रो, RRTS और हाई-स्पीड रेल को जोड़कर एक मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब विकसित करने की योजना है।

इसी दिशा में गाजियाबाद-जेवर कॉरिडोर की योजना बनाई गई है। NCRTC के प्रस्तावित 72.44 किलोमीटर के कॉरिडोर में नमो भारत और मेट्रो दोनों सेवाओं को शामिल किया गया है। यह कॉरिडोर गाजियाबाद से ग्रेटर नोएडा होते हुए जेवर एयरपोर्ट तक कनेक्टिविटी देने की योजना रखता है।

प्रस्तावित कॉरिडोर में करीब 71.5 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड और 1.29 किलोमीटर हिस्सा भूमिगत होने की योजना है। इसमें 11 नमो भारत और 18 मेट्रो स्टेशन प्रस्तावित हैं। फिलहाल यह परियोजना Detailed Project Report (DPR) के चरण में है।

दिल्ली-फरीदाबाद से सीधी कनेक्टिविटी की तैयारी

जेवर एयरपोर्ट को दिल्ली, फरीदाबाद और गुरुग्राम से बेहतर तरीके से जोड़ने के लिए 31.42 किलोमीटर के ग्रीनफील्ड कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट को भी मंजूरी मिल चुकी है।

केंद्र सरकार ने इस परियोजना की संशोधित लागत 3,630.77 करोड़ रुपये मंजूर की है। इसमें लगभग 11 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड हाईवे के रूप में विकसित किया जाना है। यह कनेक्टिविटी दिल्ली-फरीदाबाद-बल्लभगढ़-सोहना स्पर और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के जरिए जेवर एयरपोर्ट को जोड़ेगी।

इस परियोजना से दक्षिण दिल्ली, फरीदाबाद और गुरुग्राम से जेवर एयरपोर्ट तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है।

ग्रेटर नोएडा के लोगों को अभी से फायदा

जेवर एयरपोर्ट का सबसे सीधा फायदा ग्रेटर नोएडा और आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों को मिल रहा है। इन क्षेत्रों से एयरपोर्ट तक पहुंचने में अपेक्षाकृत कम समय लग रहा है।

इसके साथ ही एयरपोर्ट के आसपास औद्योगिक, लॉजिस्टिक्स, रियल एस्टेट और व्यावसायिक गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं। एयरपोर्ट से कुछ किलोमीटर की दूरी पर करीब 500 एकड़ में औद्योगिक टाउनशिप विकसित की जा रही है, जिसमें मैन्युफैक्चरिंग, क्लीन एनर्जी, डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर से जुड़े क्लस्टर प्रस्तावित हैं। आसपास फिल्म सिटी समेत कई अन्य परियोजनाएं भी विकसित हो रही हैं।

कर्मचारियों के लिए भी बदली रहने की मजबूरी

एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी का असर सिर्फ यात्रियों पर नहीं बल्कि वहां काम करने वाले कर्मचारियों पर भी पड़ रहा है। दिल्ली में रहने वाले कुछ कर्मचारियों ने रोजाना लंबी यात्रा से बचने के लिए ग्रेटर नोएडा में घर किराए पर ले लिया।

इससे रोज का सफर कम हुआ, लेकिन दूसरी तरफ किराये का खर्च बढ़ गया। एयरपोर्ट में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए नोएडा और ग्रेटर नोएडा में शिफ्ट आधारित पिक-अप और ड्रॉप सेवाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।

आने वाले समय में बनेगा बड़ा मल्टी-मॉडल हब

जेवर एयरपोर्ट की मौजूदा तस्वीर को एक संक्रमणकालीन चरण के तौर पर देखा जा सकता है। एयरपोर्ट का संचालन शुरू हो चुका है, लेकिन इसके आसपास का परिवहन नेटवर्क अभी विकसित हो रहा है।

भविष्य में सड़क, मेट्रो, नमो भारत/RRTS और हाई-स्पीड रेल को एक साथ जोड़ने की योजना है। यदि ये परियोजनाएं निर्धारित तरीके से आगे बढ़ती हैं, तो जेवर एयरपोर्ट तक पहुंचने का मौजूदा समय और खर्च दोनों कम हो सकते हैं।

एक नजर में
एयरपोर्ट: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर
कमर्शियल उड़ानें: 15 जून 2026 से
वर्तमान चरण: फेज-1
क्षेत्रफल: करीब 1,334 हेक्टेयर
कनेक्टिविटी: फिलहाल मुख्य रूप से सड़क और बस
दिल्ली से कैब खर्च: लगभग ₹1,200–₹3,500 तक, स्थान के अनुसार
भविष्य की योजना: मेट्रो, नमो भारत/RRTS और हाई-स्पीड रेल
गाजियाबाद-जेवर कॉरिडोर: 72.44 किमी प्रस्तावित
दिल्ली-फरीदाबाद-जेवर ग्रीनफील्ड कनेक्टिविटी: 31.42 किमी
मुख्य चुनौती: सस्ती और तेज पब्लिक ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी


निष्कर्ष

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने उड़ान भरनी शुरू कर दी है और NCR के विमान यात्रियों को एक नया विकल्प मिल गया है। लेकिन एयरपोर्ट का सफल होना सिर्फ रनवे और टर्मिनल से तय नहीं होगा—उसे दिल्ली-NCR से जोड़ने वाला तेज, सस्ता और भरोसेमंद परिवहन नेटवर्क भी उतना ही जरूरी है।

फिलहाल जेवर एयरपोर्ट अपने आसपास के क्षेत्र के लिए बदलाव का केंद्र बन चुका है, लेकिन इसे NCR का पूरी तरह जुड़ा हुआ एयरपोर्ट बनने में अभी कुछ समय लग सकता है।